आज हमारी क़ौम को पैग़म्बरे अकरम स. की सीरत, उनके अख़लाक़, उनके बताए हुए रास्ते, उनके चरित्र, उनके मैसेज, उनके निर्देशन और उनकी उस रहमत की ज़रूरत है जिसके द्वारा आपने इन्सानों को मुहब्बत, भाई चारे और इन्सानियत की शिक्षा दी।आज के ज़माने में रसूले अकरम स. का अपनी उम्मत और दुनिया के सभी इन्सानों के लिये जो मैसेज है वह शिक्षा, सदाचार, मुहब्बत, इज़्ज़त, सब्र और डटे रहने का मैसेज है। मुसलमानों के लिये ज़रूरी है कि वह अल्लाह के रसूल के मैसेज और उनके पैग़ाम को जानें, समझें और अपनी ज़िन्दगी में अपनाएं। हमें अपने रसूल से इज़्ज़त, इन्सानियत, मुहब्बत, दया और एकता का दर्स लेना चाहिये। हमारा समाज उसी समय एक अच्छा इस्लामी समाज बन सकता है जब वह पैग़म्बर के बताए रास्ते पर चले, शायद हमारे लिये उन जैसा बनना और बिल्कुल उन जैसा सब कुछ करना सम्भव न हो लेकिन उनके मार्ग पर चलने की कोशिश तो कर सकते हैं, इतना तो कर ही सकते हैं कि हमारा कोई भी काम उनकी लाई हुई शरियत और ख़ुदा के क़ानून के विरुद्ध न हो। आज का इन्सानी समाज भी उस ज़माने के इन्सानी समाज की तरह बीमार है जिसमें हमारे रसूल, रसूल बन कर आए थे, ख़ुदा नें आपको एक हकीम और डाक्टर बनाकर भेजा जो उनकी बीमारियों का इलाज करे (इमाम अली अ. नें नहजुल बलाग़ा में आप के बारे में फ़रमाया है: ’’طَبِیب دَوَّارُ بِطِبِّہ‘‘आप एक ऐसे वैद्ध और हकीम थे जो ख़ुद बीमारों के पास उनका इलाज करने के लिये जाया करते थे) अल्लाह तआला नें इसी रसूल के ज़रिये इन्सानों के सारी बीमारियों को इलाज करने वाला नुस्ख़ा भेजा, अब बीमारों की ज़िम्मेदारी है कि अगर वह ठीक होना चाहते हैं तो वह इस नुस्ख़े को देखें और इस पर अमल करें, अगर दुनिया का सबसे बड़ा और अच्छा डाक्टर भी हमें कोइ नुस्ख़ा दे लेकिन हम उस नुस्ख़े को न पढ़ें, या ग़लत पढ़ें, या पढ़ कर उस पर अमल न करें तो क्या हमें उस बीमारी से छुटकारा मिल जाएगा? कभी नहीं! अब अगर हमारी बीमारी ठीक नहीं होती तो उसमें उस डाक्टर की कोई ग़लती नहीं बल्कि ग़लती हमारी है जो उस डाक्टर की सुनते ही नहीं बल्कि अपनी मनमानी करते हैं।........166
31 जनवरी 2013 - 20:30
समाचार कोड: 387004
आज हमारी क़ौम को पैग़म्बरे अकरम स. की सीरत, उनके अख़लाक़, उनके बताए हुए रास्ते, उनके चरित्र, उनके मैसेज, उनके निर्देशन और उनकी उस रहमत की ज़रूरत है जिसके द्वारा आपने इन्सानों को मुहब्बत, भाई चारे और इन्सानियत की शिक्षा दी